बिलासपुर पीसीएस कोचिंग संस्थान में साइबर जागरूकता अभियान आयोजित, सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए किया प्रेरित
मुंगेली। डिजिटल युग में इंटरनेट, मोबाइल और सोशल मीडिया का उपयोग जितना बढ़ा है, उतनी ही तेजी से साइबर अपराधों की चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, संदिग्ध कॉल और बैंकिंग संबंधी धोखाधड़ी से आम नागरिकों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में ‘पहल’ कार्यक्रम के अंतर्गत बिलासपुर पीसीएस कोचिंग संस्थान में साइबर जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। इसमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को साइबर अपराधों से बचाव और डिजिटल सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपायों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल के निर्देश एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गोकुल राम रावटे के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि साइबर अपराधी लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता, जागरूकता और सावधानी ही ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं।
फर्जी लिंक और संदिग्ध कॉल से रहें सावधान
साइबर जागरूकता अभियान के दौरान विद्यार्थियों को ऑनलाइन ठगी के विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें समझाया गया कि अनजान नंबरों से आने वाली कॉल, संदिग्ध संदेश, आकर्षक ऑफर और अनजान लिंक पर बिना जांच-पड़ताल के भरोसा नहीं करना चाहिए। कई बार साइबर अपराधी बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या किसी प्रतिष्ठित संस्था का प्रतिनिधि बनकर लोगों से संपर्क करते हैं और गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं।
विद्यार्थियों को विशेष रूप से समझाया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, एटीएम या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी, पासवर्ड तथा अन्य संवेदनशील विवरण साझा न करें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें और सोशल मीडिया का उपयोग भी पूरी सावधानी के साथ करें।
मजबूत पासवर्ड और सतर्कता से सुरक्षित रहेगा डिजिटल जीवन
कार्यक्रम में सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने पर जोर दिया गया। विद्यार्थियों को मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखने, अपने सोशल मीडिया अकाउंट की गोपनीयता संबंधी सेटिंग्स का ध्यान रखने तथा मोबाइल और इंटरनेट का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की सलाह दी गई। उन्हें बताया गया कि साइबर अपराधी कई बार लोगों की जल्दबाजी, लालच या डर का फायदा उठाकर धोखाधड़ी करते हैं। इसलिए किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर जल्दबाजी में ऑनलाइन भुगतान नहीं करना चाहिए और संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर तत्काल उचित कदम उठाना चाहिए।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह जानकारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पढ़ाई, आवेदन, ऑनलाइन भुगतान और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए डिजिटल माध्यमों का व्यापक उपयोग किया जाता है। जागरूकता के माध्यम से न केवल स्वयं को सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी साइबर अपराधों के प्रति सचेत किया जा सकता है।
साइबर ठगी होने पर तत्काल करें शिकायत
अभियान के दौरान विद्यार्थियों को साइबर ठगी का शिकार होने की स्थिति में तुरंत शिकायत करने की जानकारी भी दी गई। उन्हें बताया गया कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें तथा आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in के माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत करने से संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है। पीड़ितों को लेन-देन के संदेश, स्क्रीनशॉट और अन्य संबंधित साक्ष्य सुरक्षित रखने की सलाह भी दी गई।
विद्यार्थियों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाने की पहल
‘पहल’ कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक बनाना और उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक इंटरनेट उपयोगकर्ता की सामूहिक जिम्मेदारी है। जागरूक नागरिक ही डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग कर सकते हैं और साइबर अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इस अवसर पर सब इंस्पेक्टर नवीन जांगड़े, सहायक उपनिरीक्षक मधुकर रात्रे, बबीता श्रीवास सहित साइबर टीम के सदस्य तथा कोचिंग संस्थान के शिक्षक अमित कुमार, अमित पटेल और अनामिका वैष्णव उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के प्रति सजग रहने और इस जागरूकता संदेश को अपने परिवार एवं समाज तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।

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