वॉशिंगटन। अमेरिका एक बार फिर भारतीय बासमती चावल पर प्रतिबंध की तैयारी में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन भारतीय चावल के आयात पर नए सिरे से पाबंदियां लगाने की योजना बना रहा है। वर्तमान में अमेरिका भारत से आने वाले बासमती पर 50% तक का भारी टैरिफ पहले ही लगा चुका है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक माना जाता है।
लेकिन यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने भारतीय बासमती को चुनौती दी हो। एक दौर में उसने बासमती की नकल तैयार कर ‘टेक्समती’ और ‘जसमती’ नाम से नए हाइब्रिड चावल बाजार में उतारे थे, जो अंततः भारतीय बासमती की सुगंध, लंबाई और गुणवत्ता के सामने टिक नहीं सके।
टेक्समती: बासमती का अमेरिकी संस्करण असफल
1980 के दशक में टेक्सास में विकसित ‘टेक्समती’ को इस उद्देश्य से उगाया गया था कि अमेरिका भारत से महंगे और लोकप्रिय बासमती के आयात पर निर्भरता कम कर सके। हालांकि यह हाइब्रिड न तो बासमती जैसी विशेष सुगंध दे पाया और न ही उतनी ही लंबी-मुलायम बनावट। नतीजतन, यह भारतीय बासमती को अमेरिकी बाजार से हटाने में विफल रहा। आज भी अमेरिका भारतीय बासमती चावल के सबसे बड़े आयातकों में से एक है और वहां के उपभोक्ता इसकी खुशबू और स्वाद के दीवाने हैं।
जसमती भी नहीं चला, अमेरिकी प्रयोग नाकाम
टेक्सास की कंपनी राइसटेक ने लंबे दाने वाले अमेरिकी चावल को बासमती के साथ मिलाकर ‘जसमती’ नाम का एक अन्य हाइब्रिड विकसित किया। इसमें बासमती के आकार और थाई जैसमीन चावल की फूलों जैसी सुगंध का मिश्रण था। बाज़ार में उपलब्ध होने के बावजूद, टेक्समती और जसमती दोनों ही हाइब्रिड सीमित ग्राहकों तक सिमटे रहे और भारतीय बासमती के सामने कमजोर साबित हुए। यही कारण है कि अमेरिका को भारत से होने वाले कुल चावल निर्यात में 85% से अधिक हिस्सा आज भी बासमती का ही है।
बासमती पेटेंट विवाद: भारत की बड़ी जीत
1997 में राइसटेक ने टेक्समती के आधार पर बासमती चावल का अमेरिकी पेटेंट हासिल कर लिया था, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा हो गया। भारत सहित कई एनजीओ और वैश्विक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया। दबाव बढ़ने पर अमेरिकी पेटेंट और ट्रेडमार्क ऑफिस ने राइसटेक के 20 में से 15 दावों में संशोधन किया और ‘बासमती’ शब्द को शीर्षक से हटाने का निर्देश दिया। हालांकि राइसटेक टेक्समती और जसमती बेचना जारी रख सका, परंतु बासमती पर उसका दावा खत्म हो गया।
ट्रंप की नई पाबंदी की तैयारी
अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन दोबारा आयात प्रतिबंध सख्त करने की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम अमेरिकी किसानों को बढ़ावा देने की कवायद हो सकता है। हालांकि बासमती के प्रति अमेरिकी उपभोक्ताओं के बढ़ते लगाव को देखते हुए, भारत के लिए यह बाजार आज भी मजबूत बना हुआ है।
भारतीय बासमती ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसकी सुगंध और गुणवत्ता की बराबरी कोई हाइब्रिड नहीं कर सकता।

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