रायपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के कार्यकाल के दौरान कांग्रेस से कथित रूप से जुड़े एक ठेकेदार को करोड़ों रुपये के सरकारी ठेके मिलने के आरोपों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। आरोपों के केंद्र में सरकारी विभागों की निविदा (टेंडर) प्रक्रिया और उसे संचालित करने वाले अधिकारियों की भूमिका है।
मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित ठेकेदार धमतरी जिले का निवासी बताया जा रहा है। आरोप है कि आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) द्वारा कथित शराब घोटाले और जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े मामलों में जांच और छापेमारी के बावजूद उसे लगातार विभिन्न सरकारी विभागों से बड़े ठेके मिलते रहे। हालांकि, यह भी उल्लेखनीय है कि इन मामलों में अब तक किसी न्यायालय द्वारा ठेकेदार को दोषी नहीं ठहराया गया है।
टेंडर की शर्तें मनमाफिक बनाने के आरोप
आरोप है कि कुछ विभागीय अधिकारियों ने कथित तौर पर ठेकेदार के साथ मिलकर ऐसी टेंडर शर्तें तैयार कराईं, जिनसे विशेष कंपनी को लाभ मिले और अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों की भागीदारी सीमित हो जाए।
आरोपों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में निम्न बिंदुओं को प्रभावित किया गया—
- पात्रता (Eligibility) की शर्तें
- तकनीकी विनिर्देश (Technical Specifications)
- सप्लाई की समय-सीमा
- अन्य नियम एवं शर्तें
दावा किया जा रहा है कि इन्हीं कारणों से संबंधित ठेकेदार बार-बार एल-1 (Lowest Bidder) घोषित होता रहा।
किन विभागों पर हैं आरोप?
यह मामला मुख्य रूप से निम्न विभागों से जुड़ा बताया जा रहा है—
- आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास विभाग
- महिला एवं बाल विकास विभाग
बताया जाता है कि ठेकेदार इन विभागों में—
- कंबल
- चादर
- स्कूल यूनिफॉर्म
- अन्य कल्याणकारी सामग्री
की आपूर्ति करता रहा है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि हाल ही में उसने निर्माण (Construction) क्षेत्र में भी प्रवेश किया है और साझेदारी के माध्यम से लगभग ₹80 करोड़ के कार्य प्राप्त किए हैं।
डमी कंपनियों के जरिए प्रतिस्पर्धा दिखाने के आरोप
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा का दिखावा करने के लिए डमी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया, ताकि अंतिम रूप से वही पसंदीदा ठेकेदार सबसे कम बोलीदाता (L-1) घोषित हो सके।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी सरकारी जांच रिपोर्ट ने अब तक इन दावों की पुष्टि की है।
शिकायत राज्य नेतृत्व तक पहुंची
सूत्रों के अनुसार, कथित अनियमितताओं की शिकायत राज्य के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुकी है। इसके बाद संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा और टेंडर प्रक्रिया की जांच पर विचार किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि उन अधिकारियों की भी जांच हो सकती है जिन पर नियमों के विपरीत किसी विशेष ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के आरोप हैं।
राजनीतिक विवाद भी गहराया
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है क्योंकि आरोप है कि संबंधित ठेकेदार का परिवार कांग्रेस से जुड़ा रहा है तथा परिवार के कुछ सदस्य कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं।
इसी वजह से यह सवाल उठ रहा है कि सत्ता परिवर्तन के बाद भी कथित रूप से कांग्रेस से जुड़े व्यक्ति को बड़े सरकारी ठेके कैसे मिलते रहे।
मंत्री ने जांच के दिए संकेत
सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने इन आरोपों पर चिंता जताते हुए कहा है कि यदि सरकारी खरीद प्रक्रिया में अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
बताया जा रहा है कि मंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि जिन व्यक्तियों के नाम पहले से चर्चित मामलों की जांच में सामने आए हों, उन्हें आखिर किस आधार पर बड़े सरकारी ठेके दिए गए।
अब तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं
फिलहाल, न तो सरकार और न ही किसी जांच एजेंसी ने ऐसा कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी किया है जिससे ठेकेदार या संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आरोप सिद्ध होते हों। सभी आरोप फिलहाल जांच और सत्यापन के दायरे में हैं।
यदि औपचारिक जांच होती है, तो उसमें मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं की पड़ताल की जा सकती है—
- टेंडर प्रक्रिया की वैधता
- विभागीय अधिकारियों की भूमिका
- सरकारी खरीद नियमों का पालन
- हितों के टकराव (Conflict of Interest)
- सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करती है और प्रस्तावित जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

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