रायगढ़ में ‘खाकी’ का इक़बाल सवालों के घेरे में: नशा माफिया के हौसले बुलंद, समाज सुधार की आवाज़ उठाने वाली महिला को खुलेआम जान से मारने की धमकी


रायगढ़/लैलूंगा (सीमा सिदार)।
जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लैलूंगा थाना क्षेत्र के ग्राम कोइलारडीह में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वाली एक महिला को खुलेआम जान से मारने की धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि यह धमकी उस जन-चौपाल के बाद दी गई, जिसमें खुद थाना प्रभारी और समाज के गणमान्य लोग मौजूद थे।

नशामुक्ति की पहल बनी ‘अपराध’

पीड़िता बेलासो (पति—चित्रसेन) ने गांव में अवैध शराब और गांजा बिक्री पर रोक लगाने के उद्देश्य से ग्रामीणों के साथ मिलकर एक जन-चौपाल आयोजित की थी। इस बैठक में समाज सुधार को लेकर सर्वसम्मति बनी और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में नशे के कारोबार पर लगाम लगाने का निर्णय लिया गया।

लेकिन यह पहल नशा माफिया को नागवार गुजरी।

जन-चौपाल के अगले ही दिन धमकी

15 जनवरी 2026 की सुबह आरोपी घोनो यादव पीड़िता के घर पहुंचा और गाली-गलौज करते हुए खुलेआम धमकी दी। आरोपी ने न सिर्फ जन-चौपाल के फैसले को ठेंगा दिखाया, बल्कि यह भी कहा—

“किसने चौपाल लगाई थी? मैं भी देखता हूँ कौन मेरा धंधा बंद करता है। बाहर से आदमी बुलाकर मरवा दूंगा।”

यह बयान पुलिस की मौजूदगी में हुए सामाजिक फैसले की खुली अवहेलना माना जा रहा है।

पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

घटना ने लैलूंगा पुलिस की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं—

  • जब थाना प्रभारी जन-चौपाल में मौजूद थे, तो आरोपी के हौसले इतने बुलंद कैसे हुए?
  • क्या जान से मारने की धमकी देना अब गंभीर अपराध नहीं रहा?
  • क्या नशा कारोबार को किसी का संरक्षण प्राप्त है?

दहशत में पीड़ित परिवार

धमकी के बाद पीड़िता और उसका परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है। बेलासो का कहना है कि आरोपी लगातार दबाव बना रहा है और नशे का धंधा बंद कराने वालों को “देख लेने” की बात कह रहा है। पीड़िता ने थाने में लिखित शिकायत भी दी है, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है।

थाने से भरोसा टूटा, एसपी से उम्मीद

स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता से आहत पीड़िता ने अब जिले के नए पुलिस अधीक्षक से सीधे शिकायत करने का फैसला किया है। बेलासो का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।

बड़ा सवाल

अब सवाल यह है कि— क्या रायगढ़ पुलिस समय रहते कार्रवाई कर अपनी साख बचा पाएगी,
या फिर कोइलारडीह की यह महिला भी सिस्टम की फाइलों में सिर्फ एक और “मामला” बनकर रह जाएगी?


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