पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण आजीविका को भी मिला बढ़ावा, परसा गांव में स्थापित किया गया अमरूद गार्डन
अंबिकापुर, । विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) की परसा ईस्ट एवं केते बासेन (पीईकेबी) तथा परसा कोल ब्लॉक (पीसीबी) परियोजनाओं ने पर्यावरण संरक्षण, भूमि पुनर्स्थापन और ग्रामीण आजीविका संवर्धन को केंद्र में रखते हुए कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया।
खनन के बाद पुनर्स्थापित (रेक्लैम्ड) भूमि को हरित क्षेत्र में बदलने की दिशा में चल रहे प्रयासों के तहत दोनों परियोजनाओं में अब तक 18 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया जा चुका है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप खनन प्रभावित क्षेत्र में एक संगठित मानवनिर्मित हरित वन (मैन-मेड फॉरेस्ट) विकसित हो रहा है, जो पर्यावरणीय पुनर्स्थापन का एक उल्लेखनीय उदाहरण बनता जा रहा है।
14.52 हेक्टेयर में 36,315 पौधों का रोपण
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पीईकेबी परियोजना के अंतर्गत हरिहरपुर डंप क्षेत्र के समीप 12.48 हेक्टेयर भूमि में 31,215 पौधों का रोपण किया गया। वहीं पीसीबी परियोजना में 2.04 हेक्टेयर क्षेत्र में 5,100 पौधे लगाए गए।
इस प्रकार दोनों परियोजनाओं में कुल 14.52 हेक्टेयर क्षेत्र में 36,315 पौधों का रोपण किया गया। यह आंकड़ा वर्ष 2025 में लगाए गए 27,220 पौधों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
पर्यावरण जागरूकता के लिए निकाली गई पदयात्रा
पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पीईकेबी एवं पीसीबी परियोजना परिसरों में पदयात्रा (वॉकाथॉन) का आयोजन किया गया। इस दौरान परियोजना प्रबंधन, अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगी एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली।
कार्यक्रम का संचालन परियोजना एवं क्लस्टर प्रबंधन के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें सतत विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी पर विशेष बल दिया गया।
सीएसआर पहल के तहत परसा गांव में बना अमरूद गार्डन
अदाणी समूह की सीएसआर पहल के अंतर्गत परसा गांव में 100 अमरूद के पौधों का एक फलदार बगीचा विकसित किया गया है। इसमें वीएनआर वी1 किस्म के अमरूद के पौधे लगाए गए हैं, जो लगभग छह महीने के भीतर फल देना शुरू कर देते हैं।
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराना, बागवानी को बढ़ावा देना तथा स्थानीय स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करना है।
ग्रामीणों और महिला समूहों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में परसा गांव के सरपंच, पंचायत प्रतिनिधि, महिला स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) के सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों ने इस पहल को आजीविका के लिए लाभकारी बताते हुए पौधों और बगीचे के संरक्षण का संकल्प लिया।
इस अवसर पर परियोजना के क्लस्टर प्रमुख, पर्यावरण विभाग तथा सीएसआर विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
5,000 फलदार पौधों का वितरण
पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से 3 और 4 जून 2026 को आसपास के गांवों में 5,000 फलदार पौधों का वितरण भी किया गया।
इस अभियान का उद्देश्य था:
- ग्रामीण परिवारों को पौधारोपण के लिए प्रोत्साहित करना
- पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देना
- पर्यावरण संरक्षण में सामुदायिक सहभागिता बढ़ाना
- फलदार पौधों के माध्यम से आय के नए स्रोत विकसित करना
स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तैयार की गई योजना
परियोजना प्रबंधन के अनुसार पूरे पौधारोपण अभियान की योजना स्थानीय जलवायु, भूमि की प्रकृति और दीर्घकालिक पर्यावरणीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई। पौधों की प्रजातियों का चयन उनकी जीवित रहने की क्षमता, क्षेत्रीय उपयुक्तता और पारिस्थितिक लाभों के आधार पर किया गया।
इस अभियान के सफल क्रियान्वयन में पर्यावरण, सीएसआर, उद्यानिकी, खनन और प्रशासनिक विभागों ने समन्वित रूप से कार्य किया।
सतत विकास की दिशा में मजबूत कदम
18 लाख से अधिक पौधारोपण, रेक्लैम्ड भूमि पर विकसित होते हरित क्षेत्र, ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने वाली सीएसआर पहल और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पीईकेबी एवं पीसीबी परियोजनाएं यह प्रदर्शित कर रही हैं कि जिम्मेदार खनन, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।
परियोजना प्रबंधन ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी विभागों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण समुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया।

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