ईटानगर अरुणाचल प्रदेश के एक सुदूर इलाके में हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे उत्तर-पूर्व को हिला दिया है। असम के तिनसुकिया जिले के 22 मजदूरों को लेकर जा रहा एक ट्रक गहरी खाई में गिर गया, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन लोग अब भी लापता हैं। दुर्घटना का पता किसी को भी 48 घंटे तक नहीं चला। घटना की जानकारी तब मिली जब हादसे का एकमात्र जीवित शख्स, दो दिन बाद घायल अवस्था में सेना के शिविर तक पहुंचा।
दो दिनों तक लाशों के बीच बेहोश पड़ा रहा
सोमवार रात हुए हादसे में ट्रक गहरी खाई में गिर गया था। घायल व्यक्ति दो दिन तक मृतकों के बीच पड़ा रहा और बेहोश था। होश आने पर उसने खुद को मलबे से बाहर निकाला, लगभग 300 मीटर की खड़ी चढ़ाई तय की और फिर 4 किलोमीटर पैदल चलकर बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) के एक कैंप तक पहुंचा।
रक्षा मंत्रालय के पीआरओ लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि इसी व्यक्ति ने घटना की सूचना दी। वही इस हादसे का एकमात्र जीवित बचा शख्स है।
घंटों चला रेस्क्यू अभियान
सूचना मिलते ही सेना, पुलिस और एनडीआरएफ की टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। गुरुवार शाम तक 19 शव बरामद किए जा चुके थे। सभी मृतक असम के मजदूर थे, जिन्हें अंजॉ जिले में चीन सीमा के नजदीक एक कार्यस्थल पर ले जाया जा रहा था।
रेस्क्यू टीमें अब भी दो लापता मजदूरों की तलाश में जुटी हैं।
असम मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया survivor
घायल survivor को हयूलियांग से लगभग 260 किलोमीटर दूर असम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, डिब्रूगढ़ में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है।
शव अभी बाहर नहीं निकाले जा सके
अंजॉ जिले की आपदा प्रबंधन अधिकारी नांग चिंगनी चौपू के अनुसार, सेना की टीमों ने रस्सियों की मदद से खाई में उतरकर शवों और मलबे का पता लगाया है, लेकिन उन्हें बाहर निकालने के लिए विशेष उपकरणों की जरूरत है। इसके लिए डिब्रूगढ़ से एनडीआरएफ की एक टीम आवश्यक उपकरणों के साथ भेजी जा रही है।
दूरदराज इलाकों में हादसों का भयावह सच
यह हादसा एक बार फिर दिखाता है कि अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम इलाकों में सड़कें, संपर्क साधन और तत्काल मदद कितनी चुनौतीपूर्ण रहती है — जहाँ इतनी बड़ी दुर्घटना भी दो दिन तक किसी की नजर में नहीं आई।

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