छोटे गांव से बड़ी पहचान तक


मुंगेली के ठाकुर बंधुओं ने पुलिस आरक्षक भर्ती में रचा इतिहास, पूरे छत्तीसगढ़ में बढ़ाया जिले का मान

मुंगेली/छत्तीसगढ़। कहते हैं कि सपने वही पूरे होते हैं, जिनके पीछे मेहनत, धैर्य और सही मार्गदर्शन होता है। इस कहावत को सच कर दिखाया है मुंगेली जिले के ग्राम भट्ठाली खुर्द के रहने वाले मयंक सिंह ठाकुर और मनीष सिंह ठाकुर ने। हाल ही में संपन्न हुई पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में दोनों भाइयों ने असाधारण सफलता अर्जित कर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे मुंगेली जिले और छत्तीसगढ़ राज्य को गौरवान्वित किया है।

चार वर्षों की अथक मेहनत, अनुशासन और संघर्ष के बाद बड़े भाई मयंक सिंह ठाकुर ने मुंगेली जिले में प्रथम स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया, वहीं छोटे भाई मनीष सिंह ठाकुर ने सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिले से चयनित होकर अपनी काबिलियत का परचम लहराया।


सीमित संसाधन, लेकिन असीम सपने

दोनों भाई एक साधारण किसान–शिक्षक परिवार से आते हैं। उनके पिता श्री रघुनाथ सिंह ठाकुर, एक समर्पित शिक्षक हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को हमेशा ईमानदारी, अनुशासन और शिक्षा का महत्व सिखाया। गांव की सीमित सुविधाओं, आर्थिक चुनौतियों और संसाधनों की कमी के बावजूद, परिवार ने कभी हिम्मत नहीं हारी।

गांव के माहौल में पढ़ाई करना आसान नहीं था, लेकिन दोनों भाइयों ने कठिन परिस्थितियों को ही अपनी ताकत बना लिया। सुबह की कड़ी फिजिकल ट्रेनिंग, दिनभर की पढ़ाई और रात तक रिवीजन — यही उनकी दिनचर्या बन चुकी थी।


लगातार संघर्ष और आत्मविश्वास की जीत

मयंक और मनीष दोनों ने लगातार तीन वर्षों तक पुलिस भर्ती की तैयारी की। कई बार असफलता हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हर असफल प्रयास को सीख मानकर आगे बढ़ते रहे।

मयंक सिंह ठाकुर बताते हैं,
“पहले प्रयास में असफलता मिली, लेकिन उसी दिन तय कर लिया था कि जब तक चयन नहीं होगा, तब तक रुकना नहीं है।”


बिलासपुर PCS कोचिंग सेंटर बना सफलता की सीढ़ी

दोनों भाइयों ने अपनी सफलता का श्रेय बिलासपुर PCS कोचिंग सेंटर, मुंगेली को दिया। उनके अनुसार कोचिंग सेंटर में अमित सर और उनकी पूरी टीम ने हर छात्र पर व्यक्तिगत ध्यान दिया।

छात्रों ने बताया कि—

  • फिजिकल टेस्ट की सख्त और वैज्ञानिक तैयारी
  • लिखित परीक्षा के लिए सिलेबस आधारित पढ़ाई
  • मानसिक मजबूती और इंटरव्यू गाइडेंस
    ने उनकी तैयारी को मजबूत बनाया।

मनीष सिंह ठाकुर का कहना है,
“अमित सर ने सिर्फ पढ़ाया नहीं, बल्कि यह विश्वास भी दिलाया कि हम कर सकते हैं।”


माता-पिता का आशीर्वाद बना सबसे बड़ा संबल

दोनों भाइयों का कहना है कि उनकी सफलता के पीछे माता-पिता का आशीर्वाद और त्याग सबसे बड़ा कारण है। पिता श्री रघुनाथ सिंह ठाकुर ने हमेशा बच्चों को मेहनत और ईमानदारी का रास्ता दिखाया, वहीं मां ने हर कठिन समय में धैर्य और साहस बनाए रखा।


युवाओं के लिए प्रेरणा बने ठाकुर बंधु

आज मयंक और मनीष ठाकुर की सफलता पूरे जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। यह कहानी साबित करती है कि गांव से निकलकर भी राज्य स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।

इनकी सफलता से मुंगेली जिले में उत्सव का माहौल है। गांव भट्ठाली खुर्द में लोगों ने मिठाइयाँ बांटी और दोनों भाइयों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।


संदेश

ठाकुर बंधुओं की सफलता यह संदेश देती है कि
“सपने बड़े हों तो रास्ते खुद बनते हैं।”
जरूरत है सिर्फ मेहनत, सही मार्गदर्शन और कभी हार न मानने के जज़्बे की।


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