छत्तीसगढ़ में बाघों का अस्तित्व खतरे में, वन विभाग पर उठे गंभीर सवाल


रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में बाघों और अन्य वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छत्तीसगढ़ राज्य वन्य जीव बोर्ड के सदस्य गोपाल अग्रवाल ने मुख्यमंत्री एवं वन्य जीव बोर्ड के अध्यक्ष को पत्र लिखकर प्रदेश में बढ़ते शिकार और वन विभाग की कथित लापरवाही पर कड़ी नाराज़गी जताई है।

गोपाल अग्रवाल ने पत्र में उल्लेख किया है कि बीते वर्ष बाघों की संख्या में वृद्धि वन्य जीव प्रेमियों के लिए खुशी की बात थी, लेकिन हाल के महीनों में सूरजपुर वन मंडल सहित कई क्षेत्रों में बाघ, तेंदुआ, बाइसन और सांभर जैसे संरक्षित वन्य जीवों के शिकार की घटनाएं सामने आई हैं। इससे यह प्रतीत होता है कि वन विभाग का शिकारी तत्वों पर कोई भय नहीं रह गया है।

उन्होंने देश के प्रमुख समाचार पत्र दैनिक भास्कर में प्रकाशित उस खबर का हवाला भी दिया है, जिसमें रसूखदार शिकारी अचानकमार टाइगर रिजर्व के जंगलों में खुलेआम राइफल लहराते और फायरिंग करते देखे गए। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य सरकार अचानकमार क्षेत्र में अन्य राज्यों से बाघ लाकर उनकी संख्या बढ़ाने की योजना पर विचार कर रही है।

गोपाल अग्रवाल ने सवाल उठाया है कि जब शिकारी बेखौफ जंगलों में घूम रहे हैं, तो बाघों का कुनबा बढ़ाने की योजना आखिर किस उद्देश्य से बनाई जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अचानकमार के डीएफओ यू.आर. गणेशन के कार्यकाल में गोमार्डा अभयारण्य में एक बाघ का शिकार हुआ, जिसकी जानकारी वन विभाग को नहीं बल्कि ग्रामीणों द्वारा दी गई।

पत्र में उन्होंने ऐसे अधिकारियों पर वन्य जीव सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपे जाने को अनुचित बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही इस पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय वन मंत्री, छत्तीसगढ़ के वन मंत्री, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है।

इस पूरे मामले ने प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण की वास्तविक स्थिति और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *