CGMSC घोटाला: ‘हमर लैब’ योजना से जुड़े ₹550 करोड़ के घोटाले में तीन गिरफ्तार

रायपुर | CGMSC घोटाला प्रकरण में जांच एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए “हमर लैब” योजना के अंतर्गत हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई अपराध क्रमांक 05/2025 के तहत की गई है, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(ए) सहपठित 13(2) और 7(सी) के अंतर्गत दर्ज है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में—

  • अभिषेक कौशल, डायरेक्टर, रिकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि., पंचकुला
  • राकेश जैन, प्रोप्राईटर, श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर
  • प्रिंस जैन, लाईजनर, रिकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि. (शशांक चोपड़ा का जीजा)

जांच में सामने आया है कि राज्य की आम जनता को निःशुल्क डायग्नोस्टिक जांच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित “हमर लैब” योजना के तहत मेडिकल उपकरणों, रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स की खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। निविदा प्रक्रिया में पुल टेंडरिंग के माध्यम से मोक्षित कॉर्पोरेशन को लाभ पहुंचाने के लिए रिकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि. एवं श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निविदा में भाग लेकर सहयोग किया।

विवेचना के दौरान यह भी उजागर हुआ कि निविदा में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के उद्देश्य से संबंधित फर्मों के बीच आपसी मिलीभगत और कार्टेलाइजेशन किया गया। टेंडर में केवल तीन फर्में शॉर्टलिस्ट हुईं और तीनों के वित्तीय प्रस्ताव खोले गए। तीनों फर्मों द्वारा भरे गए टेंडर में उत्पादों, पैक-साइज़, रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स का विवरण एक समान पैटर्न में प्रस्तुत किया गया। यहां तक कि जिन उत्पादों के नाम निविदा दस्तावेजों में स्पष्ट नहीं थे, उन्हें भी तीनों फर्मों ने समान रूप से दर्शाया।

दरें भी एक ही पैटर्न में कोट की गईं, जिसमें सबसे कम दर मोक्षित कॉर्पोरेशन द्वारा, उसके बाद रिकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स और श्री शारदा इंडस्ट्रीज द्वारा प्रस्तुत की गई। इसके परिणामस्वरूप मोक्षित कॉर्पोरेशन ने CGMSC को एमआरपी से तीन गुना तक अधिक दरों पर सामग्री की आपूर्ति कर लगभग ₹550 करोड़ की शासकीय राशि का दुरुपयोग किया।

गिरफ्तार आरोपियों को 19 जनवरी 2026 को माननीय विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें 27 जनवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जनहित से जुड़ी “हमर लैब” योजना में शासकीय धन के दुरुपयोग से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच जारी है। साक्ष्यों के आधार पर दोषियों की जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध कठोर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

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