बीजिंग: चीन की सेना ने मंगलवार को एक ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी कर दावा किया कि उसने सप्ताहांत में हुई रडार लॉक घटना से पहले जापान को अपने विमानवाहक पोत आधारित उड़ान प्रशिक्षण की सूचना दे दी थी। इस घटना ने दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है।
शनिवार को दक्षिण-पूर्व ओकिनावा के ऊपर चीनी सैन्य विमान द्वारा जापानी एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स (ASDF) के लड़ाकू विमानों पर रडार लॉक किए जाने पर टोक्यो ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसके जवाब में बीजिंग ने भी आरोप लगाया कि जापानी लड़ाकू विमानों की “बार-बार की निकट निगरानी और व्यवधान” ने सुरक्षा जोखिम पैदा किया।
जापान का कहना है कि उसके F-15 लड़ाकू विमानों ने चीनी विमानों से सुरक्षित दूरी बनाए रखी थी। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने चीन के उस दावे को भी खारिज किया कि प्रशिक्षण क्षेत्र की पूर्व सूचना NOTAMs के रूप में प्रकाशित की गई थी।
चीन द्वारा जारी ऑडियो में एक चीनी नौसैनिक पोत को चीनी और अंग्रेज़ी में उड़ान अभ्यास की सूचना देते हुए सुना जा सकता है, जबकि जापानी रक्षा पोत का एक कर्मी इस संदेश को प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए सुनाई देता है।
घटना का विवरण
जापानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, चीनी नौसैनिक पोत लियाओनिंग से उड़ान भरने वाले J-15 विमानों ने शनिवार को दो अलग-अलग मौकों पर ASDF के F-15 विमानों पर रडार लॉक किया—पहली बार शाम 4:32 से 4:35 बजे के बीच, और दूसरी बार 6:37 से 7:08 बजे के बीच।
स्रोतों का कहना है कि पहली बार रडार लॉक लगभग 50 किलोमीटर की दूरी से और दूसरी बार 110 किलोमीटर से अधिक दूरी से किया गया।
चीन का कहना है कि जापानी लड़ाकू विमान उसके प्रशिक्षण क्षेत्र में 50 किलोमीटर तक अंदर आ गए थे और उन्होंने भी चीनी विमानों की ओर रडार सर्च सिग्नल भेजे।
रडार लॉक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संभावित शत्रुतापूर्ण कदम माना जाता है, क्योंकि यह हथियार दागने की तैयारी का संकेत हो सकता है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि उड़ान प्रशिक्षण के दौरान खोजी रडार सक्रिय करना “सभी देशों की नौसेनाओं में आम प्रक्रिया” है और यह उड़ान सुरक्षा के लिए सामान्य उपाय है।
जापानी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि लियाओनिंग पोत से चीनी विमानों ने शनिवार से सोमवार के बीच लगभग 140 बार उड़ान प्रशिक्षण (टेकऑफ और लैंडिंग) किए।
दोनों देशों के बीच तनाव हाल ही में तब और बढ़ा जब जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने यह कहा कि ताइवान पर किसी भी संभावित हमले को जापान के लिए अस्तित्वगत खतरा माना जा सकता है, जिस पर चीन ने कड़ा विरोध जताया।

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