नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) की रूपरेखा पर सहमति बन गई है, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने संवेदनशील घरेलू हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि इस फ्रेमवर्क से भारतीय निर्यातकों, खासकर एमएसएमई, किसानों और मछुआरों को करीब 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जबकि कृषि और डेयरी जैसे अहम सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
कृषि क्षेत्र में संतुलित रुख
सरकार ने कहा है कि कृषि क्षेत्र में बेहद सावधानी बरती गई है। जिन उत्पादों से किसानों की आय, ग्रामीण आजीविका और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता था, उन्हें समझौते से बाहर रखा गया है। वहीं, कुछ चुनिंदा उत्पादों पर सीमित रियायत दी गई है, जिनका देश के मुख्य कृषि उत्पादन पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ता।
इन कृषि उत्पादों पर दी गई सीमित छूट
भारत ने अमेरिका से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर टैरिफ घटाने या खत्म करने पर सहमति दी है। इनमें शामिल हैं—
- पशु आहार से जुड़े ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs)
- रेड सोरघम
- बादाम और अखरोट जैसे ट्री नट्स
- ताजे और प्रोसेस्ड फल
- सोयाबीन तेल
- वाइन और अन्य स्पिरिट्स
सरकार का कहना है कि इन उत्पादों से न तो भारतीय किसानों को नुकसान होगा और न ही खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी।
संवेदनशील फसलों को पूरी सुरक्षा
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि देश की प्रमुख फसलों को किसी भी तरह की छूट नहीं दी गई है।
पूरी तरह संरक्षित फसलों में शामिल हैं—
- गेहूं, चावल, मक्का, जौ
- ज्वार, रागी, बाजरा और अन्य मोटे अनाज
- कोदो, कांगनी, ओट्स, अमरंथ
- आटा, मैदा और अन्य प्रसंस्कृत अनाज उत्पाद
डेयरी सेक्टर को ‘फुल प्रोटेक्शन’
भारत के करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका से जुड़े डेयरी सेक्टर को इस ट्रेड डील से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
इन उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी गई—
- दूध और दूध पाउडर
- क्रीम, घी, मक्खन
- दही, पनीर और चीज़
सरकार ने साफ किया है कि सब्सिडी वाले विदेशी डेयरी उत्पादों से भारतीय किसानों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
मसाले, फल और सब्जियां भी सुरक्षित
भारत के मशहूर मसालों—काली मिर्च, हल्दी, जीरा, धनिया, लौंग, दालचीनी, अदरक—को भी समझौते से बाहर रखा गया है।
इसके अलावा आलू, प्याज, टमाटर, भिंडी, मटर, मशरूम, कद्दू जैसी सब्जियां और आम, केला, संतरा, अंगूर जैसे फल भी संरक्षित श्रेणी में हैं।
अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीद का लक्ष्य
समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर का आयात करेगा। इसमें—
- तेल, गैस और कोकिंग कोल
- विमान और विमान पुर्जे
- डेटा सेंटर उपकरण
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े हाई-टेक प्रोडक्ट्स शामिल हैं।
भारतीय निर्यातकों को क्या फायदा
अमेरिका अधिकांश भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत टैरिफ बनाए रखेगा, लेकिन एविएशन, ऑटो पार्ट्स और फार्मा सेक्टर में विशेष राहत पर सहमति बनी है।
ऑटो पार्ट्स के लिए कोटा तय होगा, जबकि जेनेरिक दवाओं और उनके कच्चे माल को लेकर बातचीत जारी है।
टैरिफ में कटौती और आगे की राह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की है। रूस से तेल आयात को लेकर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी हाल ही में हटा लिया गया है।
दोनों देशों का लक्ष्य मार्च 2026 तक पूर्ण और औपचारिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई दिशा दे सकती है, साथ ही भारत के घरेलू हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी।

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