नई शिक्षा नीति के बाद भारत में शिक्षकों की भारी मांग पैदा हुई है। नीति के अनुसार हर 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना चाहिए, लेकिन वास्तविकता यह है कि देशभर में लाखों पद खाली पड़े हैं। ऐसे में युवाओं के लिए सरकारी शिक्षक बनने का यह सही समय माना जा रहा है। शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि सही योग्यता, मान्यता प्राप्त कोर्स और पात्रता परीक्षाओं के माध्यम से शिक्षक बनने का मार्ग सरल हो सकता है।
शिक्षक बनने के मुख्य स्तर
भारत में शिक्षक तीन प्रमुख श्रेणियों में नियुक्त होते हैं:
प्राइमरी शिक्षक (PRT) – कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने के योग्य
टीजीटी (TGT) – कक्षा 6 से 8 तक
पीजीटी (PGT) – कक्षा 11 और 12 के लिए
इनके लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएं तय हैं:
- प्राइमरी शिक्षक: 12वीं के बाद D.El.Ed / JBT या 4 वर्षीय B.El.Ed
- TGT: ग्रैजुएशन + B.Ed
- PGT: पोस्ट-ग्रैजुएशन + B.Ed
विशेषज्ञ हिमांशी सिंह बताती हैं कि CTET या राज्य TET उत्तीर्ण करना भी प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अनिवार्य है, चाहे वह सरकारी स्कूल में आवेदन करे या प्रतिष्ठित निजी संस्थान में।
टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट क्यों जरूरी?
CTET को देश की सबसे कठिन पात्रता परीक्षाओं में माना जाता है। इसका क्वालिफिकेशन रेट मात्र 14–15% है। इस परीक्षा को पास करने वाले उम्मीदवार केंद्र सरकार के स्कूलों—जैसे केवी, नवोदय—में आवेदन के पात्र हो जाते हैं।
इसी तरह विभिन्न राज्यों में UPTET, REET, HTET, MAHA TET जैसी STET परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं।
कौन-से कोर्स जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार 12वीं के बाद कई कोर्स हैं जो शिक्षक बनने का मार्ग बनाते हैं:
- B.Ed (2 वर्ष) – सबसे लोकप्रिय विकल्प
- इंटीग्रेटेड B.Ed (4 वर्ष)
- ITEP (Integrated Teacher Education Programme – 4 वर्ष)
- B.El.Ed (4 वर्ष) – प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए
- D.El.Ed (2 वर्ष) – कक्षा 1–5 के लिए
- D.Ed (2 वर्ष) – कक्षा 1–8 के लिए
- NTT (Nursery Teacher Training) – नर्सरी/प्री-स्कूल के लिए
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कोर्स का चयन करते समय यह देखना आवश्यक है कि वह NCTE (National Council for Teacher Education) से मान्यता प्राप्त हो। बिना मान्यता वाले कोर्स भविष्य में मान्य नहीं होते।
परीक्षा की तैयारी कैसे करें?
शिक्षक सचिन के अनुसार CTET/TET की तैयारी के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं:
- NCERT की किताबें
- पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र
- पेडागोजी की स्पष्ट समझ
- नियमित मॉक टेस्ट
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विद्यार्थी तीन महीने तक नियमित अध्ययन करें, तो इन परीक्षाओं को आसानी से पास किया जा सकता है।
शिक्षक क्यों बनें?
टीचिंग के क्षेत्र में 15 साल से काम कर रहे सचिन कहते हैं, “अगर आप बदलाव देखना चाहते हैं, तो जड़ों में काम करें। शिक्षक वही कर सकता है।”
वहीं टीईटी प्रशिक्षक सौरव बताते हैं कि सरकारी शिक्षक की नौकरी स्थिर, सम्मानजनक और सुरक्षित होती है। शुरुआती वेतन लगभग 50 हजार रुपये मासिक तक मिलता है, साथ ही वर्क-लाइफ़ बैलेंस भी बेहतर रहता है।
निष्कर्ष
नई शिक्षा नीति, बढ़ते स्कूलों और शिक्षकों की कमी को देखते हुए यह समय युवाओं के लिए सुनहरा अवसर माना जा रहा है। सही कोर्स, उचित पात्रता परीक्षाएं और निरंतर तैयारी के साथ कोई भी इस स्थिर और सम्मानित पेशे में प्रवेश कर सकता है।

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