नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता न सिर्फ एशिया बल्कि वैश्विक वनस्पति तेल बाजार में हलचल मचा रहा है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच हाल ही में दिल्ली में गहन चर्चाएँ हुईं और संकेत मिल रहे हैं कि एक बड़ा ट्रेड पैकेज जल्द ही फाइनल हो सकता है। लेकिन इस डील से दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया की चिंताएँ तेजी से बढ़ गई हैं।
अमेरिका से सस्ते सोयाबीन ऑयल का रास्ता खुला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत अमेरिका से सोयाबीन, मक्का और कुछ डेयरी प्रोडक्ट्स के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। यदि भारत ने अमेरिकी जीएम सोयाबीन आयात को मंजूरी दे दी, तो देश का आयातित वनस्पति तेलों पर निर्भरता कम हो सकती है।
इस बदलाव से लंबी दूरी वाले सोयाबीन ऑयल शिपमेंट में वृद्धि होगी, जो अमेरिका के लिए एक बड़ा बाजार खोल सकता है।
इंडोनेशिया को सबसे बड़ा झटका—पाम ऑयल पर खतरा
Hellenic Shipping News की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत-अमेरिका ट्रेड डील से पाम ऑयल की वैश्विक सप्लाई पर दबाव और बढ़ सकता है।
इंडोनेशिया पहले ही अपने बायोडीजल मानकों में लगातार वृद्धि कर चुका है—
- B30 (2023)
- B35 (2024)
- B40 (2025)
इन अनिवार्यताओं ने घरेलू पाम ऑयल की मांग को तेजी से बढ़ाया है। नतीजतन, इंडोनेशिया का पाम ऑयल निर्यात 2023 के 26.1 मिलियन टन से घटकर 2024 में सिर्फ 21.6 मिलियन टन रह गया।
कम निर्यात और बढ़ती वैश्विक मांग के कारण पाम ऑयल की कीमतें उछल गई हैं, जिससे भारत जैसे कीमत-संवेदनशील देशों ने सोयाबीन ऑयल की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।
भारत में सोयाबीन ऑयल की हिस्सेदारी बढ़ी
पहले भारतीय बाजार में पाम ऑयल की कीमतें काफी सस्ती रहती थीं, लेकिन 2024 में आपूर्ति घटने से सोयाबीन ऑयल की कीमतें पाम ऑयल से नीचे आ गईं।
इसके चलते 2023 से भारत के कुल वनस्पति तेल आयात में सोयाबीन ऑयल का हिस्सा पाम ऑयल से आगे निकल गया।
लैटिन अमेरिका से लंबी दूरी पर आने वाले सोयाबीन ऑयल शिपमेंट ने एमआर केमिकल टैंकरों की टन-मील मांग को भी बढ़ाया है।
ट्रेड डील से इंडोनेशिया की चिंता क्यों बढ़ी?
अगर भारत अमेरिका से GM सोयाबीन आयात शुरू कर देता है, तो भारत में
- घरेलू पेराई (क्रशिंग) बढ़ेगी
- वनस्पति तेल आयात कम होंगे
- खासकर पाम ऑयल की लंबी दूरी वाली शिपमेंट घटेगी
यह बदलाव इंडोनेशिया के लिए एक बड़ा झटका होगा, क्योंकि वह दुनिया का सबसे बड़ा पाम ऑयल निर्यातक है।
निष्कर्ष
US-India Trade Deal न सिर्फ भारत-अमेरिका के रिश्तों के लिए अहम है, बल्कि यह वैश्विक तेल बाजार को भी नया स्वरूप दे सकता है। इंडोनेशिया को डर है कि भारत की नीतियों में बदलाव से उसकी पाम ऑयल इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान हो सकता है—और यही वजह है कि इस डील पर उसकी नजरें टिकी हुई हैं।

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