पीएम मोदी ने कराया ‘हवाई चप्पल से हवाई जहाज’ का सपना पूरा, लेकिन किराए क्यों बढ़ते हैं? विमानन मंत्री ने संसद में दिया बड़ा बयान


नई दिल्ली। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने शुक्रवार को संसद में भारत के तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर, हवाई किरायों में उतार-चढ़ाव और संकट के समय सरकार की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय विमानन क्षेत्र आम लोगों से गहराई से जुड़ गया है, जिसे ‘हवाई चप्पल से हवाई जहाज’ के नारे से समझा जा सकता है।


“पूरे साल के लिए हवाई किराए तय करना संभव नहीं” — मंत्री नायडू

बढ़ते किरायों पर सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने साफ कहा कि हवाई किरायों को पूरे साल के लिए फिक्स नहीं किया जा सकता, क्योंकि उनका निर्धारण पूरी तरह मांग और आपूर्ति पर आधारित होता है।

उन्होंने बताया—

  • त्योहारों या विशेष मौकों—जैसे ओणम—के दौरान कुछ रूट्स पर किराए बढ़ जाते हैं।
  • लेकिन ऐसा सालभर नहीं होता।
  • सामान्य परिस्थितियों में बाजार ही किराया तय करता है, सरकार नहीं।

असाधारण परिस्थितियों में सरकार कर सकती है हस्तक्षेप

नायडू ने जोर देकर कहा कि असाधारण परिस्थितियों में केंद्र सरकार के पास हवाई किरायों पर रोक या सीमा तय करने की पूरी शक्ति है।

उन्होंने उदाहरण दिए—

  • कोविड-19 महामारी
  • प्रयागराज कुंभ
  • पहलगाम हमला
  • हालिया इंडिगो संकट

इन सभी मौकों पर सरकार ने हस्तक्षेप कर कंपनियों को मनमाने किराए बढ़ाने से रोका।


इंडिगो संकट पर क्या बोली सरकार?

मंत्री ने बताया कि इंडिगो की क्षमता में अचानक आई कमी के कारण—

  • कई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं
  • कई रूट्स बुरी तरह प्रभावित हुए
  • अन्य एयरलाइंस पर भी दबाव बढ़ा

अगर सरकार समय पर दखल नहीं देती, तो हवाई किरायों में भारी उछाल आ सकता था।

इसके बाद सरकार ने तुरंत दूरी के आधार पर अधिकतम किराए की सीमा तय कर दी—

  • 500 किमी तक: अधिकतम ₹7,500
  • 500–1,000 किमी: अधिकतम ₹12,000
  • 1,000–1,500 किमी: अधिकतम ₹15,000
  • 1,500 किमी से अधिक: अधिकतम ₹18,000

यह फैसला यात्रियों को मनमानी कीमतों से बचाने के लिए लिया गया।


प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए एविएशन सेक्टर को डिरेगुलेट किया गया

नायडू ने कहा कि विमानन क्षेत्र में अधिक कंपनियों की भागीदारी और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए इसे डिरेगुलेट किया गया है।
लेकिन साथ ही उन्होंने दोहराया कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि यह क्षेत्र आम लोगों की पहुंच में बना रहे, जो पीएम मोदी के विज़न का हिस्सा है।


निष्कर्ष

भारत का विमानन क्षेत्र दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ रहा है। सरकार का कहना है कि सामान्य स्थिति में किराए बाजार तय करता है, लेकिन किसी भी असाधारण परिस्थिति में यात्रियों की सुरक्षा के लिए सरकार तुरंत कदम उठाती है
त्योहारों में बढ़ने वाले किराए अस्थायी होते हैं और यह पूरे साल की प्रवृत्ति नहीं है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *