छत्तीसगढ़ में मखाना खेती को नई उड़ान, खेती पर 40% और प्रसंस्करण इकाइयों पर 50% तक अनुदान


रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से छत्तीसगढ़ को मखाना बोर्ड में शामिल किया गया है। यह निर्णय प्रदेश में मखाना की खेती करने वाले किसानों के लिए ऐतिहासिक और लाभकारी साबित होगा। मखाना बोर्ड के गठन से किसानों को वैज्ञानिक खेती, जल प्रबंधन, प्रसंस्करण तकनीक और बाजार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी।

हाल ही में धमतरी जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ में मखाना की खेती के सफल प्रयासों को देखते हुए मखाना बोर्ड के गठन की घोषणा की थी। उन्होंने राज्य में हो रहे उत्कृष्ट मखाना उत्पादन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मखाना बोर्ड किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इसी क्रम में कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव श्रीमती शहला निगार की अध्यक्षता में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर के अंतर्गत राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में संचालक उद्यानिकी श्री लोकेश कुमार ने बताया कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 से “सेंट्रल सेक्टर स्कीम फॉर डेवलपमेंट ऑफ मखाना” प्रारंभ की जा रही है, जिसमें 100 प्रतिशत केंद्रीय अनुदान का प्रावधान है।

योजना के तहत वर्ष 2025-26 के लिए आगामी चार माह हेतु 180 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। तालाब में मखाना की खेती करने वाले किसानों को 1.79 लाख रुपये की इकाई लागत पर 40 प्रतिशत यानी 72 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा। वहीं स्वयं के खेत में मखाना उत्पादन करने वाले किसानों को 1.32 लाख रुपये की इकाई लागत पर 40 प्रतिशत यानी 53 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। नए तालाब के निर्माण पर 7 लाख रुपये की लागत के विरुद्ध 40 प्रतिशत अर्थात 2.80 लाख रुपये का अनुदान भी निर्धारित किया गया है।

मखाना के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए माइक्रो लेवल मखाना प्रसंस्करण इकाई पर 10 लाख रुपये की लागत पर 35 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। एफपीओ के लिए स्माल लेवल प्रसंस्करण इकाई (39 लाख रुपये की लागत) पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है, जबकि निजी क्षेत्र को इसी लागत पर 35 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। लार्ज लेवल मखाना प्रसंस्करण इकाई के लिए 7 करोड़ रुपये की लागत पर 35 प्रतिशत अनुदान देने की व्यवस्था की गई है।

योजना के अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ एक्सपोजर विजिट भी कराई जा रही है। मखाना की उन्नत खेती को प्रोत्साहित करने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय द्वारा उत्कृष्ट मखाना खेती का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में मखाना उत्पादन को नई पहचान मिलेगी और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।


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