भारत में हर वर्ग को सशक्त बना रहा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस


नई दिल्ली:
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को केवल तकनीक नहीं, बल्कि समावेशी विकास का माध्यम माना जा रहा है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, युवाओं को हुनरमंद करने और असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों को सुरक्षा व अवसर देने में AI की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी दिशा में अगले महीने इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट आयोजित किया जाएगा, जिसमें दुनिया भर के AI विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।

इस प्रयास के केंद्र में मार्च 2024 में स्वीकृत इंडिया AI मिशन है। इस मिशन का उद्देश्य इंसानों की जगह लेना नहीं, बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाना है। इसके तहत कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने, AI इनोवेशन सेंटर स्थापित करने, भरोसेमंद डेटा प्लेटफॉर्म तैयार करने, AI आधारित एप्लिकेशन विकसित करने, युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने और स्टार्टअप्स को आर्थिक सहायता देने जैसे कदम उठाए गए हैं।

आज शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और छोटे कारोबार तक AI की पहुंच बन चुकी है। खास बात यह है कि भारत में विकसित हो रहे AI समाधान भाषाई और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं, ताकि महिलाएं, किसान, गिग वर्कर्स और छोटे उद्यमी इसका सीधा लाभ उठा सकें।

गिग इकॉनमी में AI महिलाओं के लिए नए अवसर खोल रहा है। AI आधारित प्लेटफॉर्म्स की मदद से महिलाएं ड्राइवर, डिलीवरी पार्टनर और ऑनलाइन उद्यमी के रूप में आत्मनिर्भर बन रही हैं। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में स्थानीय भाषाओं वाले AI असिस्टेंट कम पढ़ी-लिखी महिलाओं के लिए डिजिटल लेनदेन और वित्तीय प्रबंधन को आसान बना रहे हैं।

युवाओं के लिए AI भविष्य की दिशा बनकर उभर रहा है। सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग से डिजिटल साक्षरता से लेकर एडवांस मशीन लर्निंग तक के प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ‘AI फॉर ऑल’ जैसे अभियानों के जरिए युवाओं को AI की बुनियादी समझ दी जा रही है।

AI का उपयोग महिला सुरक्षा, आपातकालीन सेवाओं और कृषि में भी बढ़ रहा है। कई स्टार्टअप्स AI के जरिए सुरक्षा प्रणालियां मजबूत कर रहे हैं, जबकि खेती में इससे कीट प्रकोप और मौसम से जुड़े जोखिमों का पूर्वानुमान मिल रहा है। वहीं, फिनटेक कंपनियां AI की मदद से उन महिला उद्यमियों को ऋण उपलब्ध करा रही हैं, जो पहले बैंकिंग व्यवस्था से बाहर थीं।

नीति आयोग के अनुसार, AI स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बढ़ाकर देश के करोड़ों असंगठित श्रमिकों को सशक्त बना सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में AI की असली सफलता तकनीकी जटिलता से नहीं, बल्कि अवसर और समानता देने की उसकी क्षमता से आंकी जाएगी

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