जांजगीर-चांपा में मछुआ समाज का हल्ला बोल


मत्स्य विभाग पर गंभीर आरोप, तीन घंटे रहा चक्काजाम

जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में मंगलवार को मछुआ समाज ने मत्स्य विभाग के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। मछुआ समाज के लोगों ने कुलीपोटा स्थित मत्स्य विभाग कार्यालय के सामने चक्काजाम कर दिया, जिससे यातायात प्रभावित रहा। यह चक्काजाम करीब तीन घंटे तक चला।

मछुआ समाज का आरोप है कि मत्स्य विभाग के अधिकारी नियमों को दरकिनार कर पैसे के लेन-देन के माध्यम से गैर-मछुआ समूहों को तालाबों का पट्टा दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे पारंपरिक मछुआ समाज के लोगों को उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है।

इस आंदोलन की अगुवाई छत्तीसगढ़ मछुआरा संघ की प्रदेश अध्यक्ष गायत्री गायग्वार ने की। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी जानबूझकर मछुआ समाज की उपेक्षा कर रहे हैं।

गायत्री गायग्वार ने कहा,
“हम लगातार मत्स्य विभाग के अधिकारियों से मिलने आ रहे हैं, लेकिन हमें इधर-उधर भटकाया जाता है। नियमों के खिलाफ जाकर गैर-मछुआ समितियों को तालाब आबंटित किए जा रहे हैं। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”

वहीं, मत्स्य विभाग ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। जिला मत्स्य विभाग के सहायक मत्स्य अधिकारी सीताराम महिवार ने कहा कि तालाबों का चयन और पट्टा शासन के नियमों के अनुसार किया जाता है।

उन्होंने बताया कि मछुआ समितियों को प्राथमिकता दी जाती है और कई मामलों में न्यायालय के आदेश पर मछुआ समाज को तालाब आवंटित किए गए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शासन के प्रावधानों के तहत अन्य समाज के पात्र आवेदकों को भी मछली पालन के लिए पट्टा दिया जाता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांजगीर-चांपा के एसडीएम मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से चर्चा की। एसडीएम ने शिकायतों की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद मछुआ समाज ने अपना चक्काजाम समाप्त कर दिया।

इस घटना के बाद जिले में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं और मछुआ समाज ने पारदर्शिता व न्याय की मांग की है।


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