इजरायल ने फिर जताया भारत पर भरोसा, दोस्ती की मिसाल बनेगा खास जंगी सिस्टम


नई दिल्ली: भारत–इजरायल के बीच रणनीतिक और रक्षा संबंध लगातार मजबूत होते जा रहे हैं। इजरायल पहले भी कई मौकों पर भारत को उन्नत हथियार और अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध करा चुका है। अब एक बार फिर इजरायल ने भारत पर भरोसा जताते हुए उसे अपनी खास सैन्य तकनीक साझा करने का फैसला किया है।

इस दिशा में एक अहम कदम के तहत पुणे स्थित बेलराइज इंडस्ट्रीज ने इजरायल की रक्षा कंपनी प्लासन सासा (Plasan Sasa) के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। इस समझौते के तहत भारत में स्वायत्त इलेक्ट्रिक सैन्य वाहनों के कंपोनेंट्स का संयुक्त निर्माण किया जाएगा, जो पूरी तरह भारतीय सेना की जरूरतों के अनुरूप होंगे।

भारतीय सेना के लिए तैयार होगा ATEMM

इस साझेदारी के तहत प्लासन का ऑल-टेरेन इलेक्ट्रिक मिशन मॉड्यूल (ATEMM) भारत में विकसित और निर्मित किया जाएगा। ATEMM एक 2×2 इलेक्ट्रिक-संचालित मानवरहित ग्राउंड वाहन (UGV) है, जिसे आधुनिक युद्धक्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।

यह सिस्टम खासतौर पर

  • अधिक पेलोड क्षमता
  • ऑनबोर्ड ऊर्जा उपलब्धता
  • बेहतर उत्तरजीविता
  • और कठिन सतहों पर बेहतरीन गतिशीलता

जैसे फीचर्स के साथ तैयार किया गया है।

50 किलोवॉट तक बिजली देने में सक्षम

रक्षा मामलों की वेबसाइट The Defense Post के अनुसार, लगभग 2 मीटर (7 फुट) लंबे इस प्लेटफॉर्म को स्टैंडअलोन यूनिट के रूप में या ट्रेलर अटैचमेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सिस्टम अन्य सैन्य वाहनों या उपकरणों को 50 किलोवॉट प्रति घंटे तक बिजली सप्लाई करने में सक्षम है, जो युद्धक्षेत्र में बड़ी रणनीतिक बढ़त प्रदान करता है।

2,000 किलो से ज्यादा पेलोड क्षमता

रिपोर्ट के मुताबिक, ATEMM को अन्य मॉड्यूल्स के साथ जोड़कर इसे और अधिक शक्तिशाली बनाया जा सकता है। ऐसे में यह सिस्टम 800 हॉर्सपावर के बराबर फुली इलेक्ट्रिक ड्राइव के साथ
4×4 या 8×8 मानवरहित ग्राउंड वाहन में बदला जा सकता है, जिसकी पेलोड क्षमता 2,000 किलोग्राम से भी अधिक होगी।

भारत–इजरायल रक्षा सहयोग को नई मजबूती

यह साझेदारी न केवल भारत–इजरायल रक्षा संबंधों को और मजबूत करती है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत पहल को भी नई गति देती है। भारत में इस तरह की उन्नत तकनीक का निर्माण भारतीय सेना की क्षमताओं को बढ़ाने के साथ-साथ देश को भविष्य की युद्ध तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, इजरायल द्वारा भारत के साथ इस अत्याधुनिक सैन्य तकनीक को साझा करना दोनों देशों की गहरी दोस्ती और आपसी भरोसे का स्पष्ट संकेत है।

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