उर्वरकों की वहनीयता, मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि उत्पादकता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम
नई दिल्ली: भारतीय कृषि में संतुलित उर्वरीकरण को बढ़ावा देने और किसानों को राहत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने रबी मौसम 2025–26 के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरों को मंजूरी दे दी है। ये दरें 1 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेंगी और फॉस्फेटिक एवं पोटाशिक (पी एंड के) उर्वरकों पर लागू होंगी, जिनमें डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) तथा विभिन्न एनपीके/एनपीकेएस ग्रेड शामिल हैं।
यह निर्णय किसानों की आदान लागत को नियंत्रित रखने, उर्वरकों की समय पर और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा मृदा स्वास्थ्य और कृषि स्थिरता को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बजटीय प्रावधान और वित्तीय प्रतिबद्धता
रबी 2025–26 के लिए एनबीएस योजना के अंतर्गत लगभग ₹37,952.29 करोड़ की बजटीय आवश्यकता अनुमानित की गई है, जो खरीफ 2025 की तुलना में करीब ₹736 करोड़ अधिक है। यह वृद्धि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों, परिवहन लागत और घरेलू आपूर्ति आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए की गई है।
वर्ष 2022–23 से 2024–25 के दौरान केंद्र सरकार ने एनबीएस योजना के तहत ₹2.04 लाख करोड़ से अधिक की सब्सिडी आवंटित की है। इस निरंतर वित्तीय सहयोग से वैश्विक मूल्य उतार-चढ़ाव के बावजूद किसानों को उर्वरकों की वहनीय उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।
पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना क्या है?
1 अप्रैल 2010 से लागू एनबीएस योजना उर्वरक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार है। इस योजना में उर्वरकों को उत्पाद के रूप में नहीं, बल्कि उनमें निहित पोषक तत्वों के आधार पर सब्सिडी दी जाती है।
एनबीएस योजना के अंतर्गत चार प्रमुख पोषक तत्वों पर सब्सिडी निर्धारित की जाती है:
- नाइट्रोजन (एन)
- फॉस्फोरस (पी)
- पोटाश (के)
- सल्फर (एस)
इस प्रणाली से किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन के लिए प्रोत्साहन मिलता है और किसी एक उर्वरक के अत्यधिक उपयोग से होने वाले मृदा क्षरण से बचाव होता है।
रबी 2025–26 के लिए पोषक तत्वों पर सब्सिडी दरें
सरकार द्वारा रबी 2025–26 के लिए निम्नलिखित प्रति किलोग्राम सब्सिडी दरें तय की गई हैं:
- नाइट्रोजन (एन): ₹43.02 प्रति किग्रा
- फॉस्फोरस (पी): ₹47.96 प्रति किग्रा
- पोटाश (के): ₹2.38 प्रति किग्रा
- सल्फर (एस): ₹2.87 प्रति किग्रा
इन दरों के आधार पर विभिन्न पी एंड के उर्वरक ग्रेडों के लिए उत्पाद-वार सब्सिडी निर्धारित की जाएगी।
डीएपी और अन्य उर्वरकों पर राहत
रबी 2025–26 के लिए डीएपी पर सब्सिडी बढ़ाकर ₹29,805 प्रति मीट्रिक टन कर दी गई है, जो रबी 2024–25 में ₹21,911 प्रति मीट्रिक टन थी। यह वृद्धि किसानों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।
इसके अलावा, अमोनियम सल्फेट (घरेलू एवं आयातित दोनों) को भी पहली बार रबी 2025–26 में एनबीएस योजना के दायरे में शामिल किया गया है।
वर्तमान में 28 प्रकार के पी एंड के उर्वरक ग्रेड एनबीएस योजना के तहत सब्सिडीयुक्त दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
सूक्ष्म पोषक तत्वों से सुदृढ़ उर्वरकों को बढ़ावा
मृदा में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने सुदृढ़ (फॉर्टिफाइड) उर्वरकों पर अतिरिक्त सब्सिडी देने का प्रावधान किया है:
- बोरॉन (B): ₹300 प्रति मीट्रिक टन
- जिंक (Zn): ₹500 प्रति मीट्रिक टन
इससे किसानों को संतुलित और वैज्ञानिक पोषण प्रबंधन अपनाने में मदद मिलेगी।
घरेलू उर्वरक उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि
एनबीएस योजना के चलते देश में उर्वरक निर्माण क्षमता को मजबूती मिली है और आयात पर निर्भरता कम हुई है।
- वर्ष 2014 में पी एंड के उर्वरकों का उत्पादन 112.19 लाख मीट्रिक टन था
- जो बढ़कर 30 दिसंबर 2025 तक 168.55 लाख मीट्रिक टन हो गया है
यह 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
मृदा स्वास्थ्य और कृषि उत्पादकता में सुधार
एनबीएस योजना के तहत संतुलित उर्वरीकरण को बढ़ावा मिलने से खेतों की उर्वरता में सुधार हुआ है। इसके सकारात्मक परिणामस्वरूप:
- खाद्यान्न उत्पादकता वर्ष 2010–11 में 1,930 किग्रा प्रति हेक्टेयर से बढ़कर
- 2024–25 में 2,578 किग्रा प्रति हेक्टेयर हो गई है।
निगरानी, पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था
उर्वरकों की कीमत और आपूर्ति पर नियंत्रण के लिए सरकार ने सख्त निगरानी तंत्र लागू किया है:
- उर्वरक कंपनियों को ऑडिटेड लागत विवरण और एमआरपी प्रस्तुत करना अनिवार्य
- छपे हुए एमआरपी से अधिक कीमत वसूलना आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत दंडनीय अपराध
- इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (आईएफएमएस) के माध्यम से उत्पादन, आयात, परिवहन और वितरण की रियल-टाइम निगरानी
निष्कर्ष
रबी 2025–26 के लिए एनबीएस दरों को मंजूरी देना सरकार की उस नीति को दर्शाता है, जो किसान कल्याण, मृदा स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता और राजकोषीय संतुलन के बीच समन्वय स्थापित करती है। डीएपी पर बढ़ी हुई सब्सिडी, नए उर्वरक ग्रेडों का समावेश, सुदृढ़ उर्वरकों को प्रोत्साहन और डिजिटल निगरानी व्यवस्था के माध्यम से एनबीएस योजना भारत की टिकाऊ और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था की मजबूत आधारशिला बनकर उभरी है।

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