मुंगेली/रायपुर। Chhattisgarh Diocese Board of Education से जुड़े स्कूलों में चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। Rambo Memorial Higher Secondary English Medium School के प्रबंधन, कर्मचारियों की बर्खास्तगी, चुनाव प्रक्रिया और वित्तीय लेनदेन को लेकर दोनों पक्ष खुलकर आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर वर्तमान प्रबंधन समिति खुद को वैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट से राहत मिलने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर पूर्व प्रबंधन और कर्मचारियों से जुड़े पदाधिकारियों ने गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं।
प्रेस वार्ता में लगाए गंभीर आरोप
रेम्बो स्कूल के को-मैनेजर Sandeep Lal और सीनियर मैनेजर Maggie Prasad ने प्रेस वार्ता में वर्तमान प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। दोनों ने आरोप लगाया कि स्कूल और डायोसिस बोर्ड के संचालन में नियमों की अनदेखी की गई और कर्मचारियों तथा शिक्षकों के हितों की उपेक्षा हुई।
संदीप लाल ने कहा कि बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए प्रशासनिक फैसले लिए गए और लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को अचानक निलंबित एवं बर्खास्त कर दिया गया। उनके अनुसार इससे शिक्षकों और कर्मचारियों में भय और अस्थिरता का माहौल बन गया है।
“35 कर्मचारियों को बिना प्रक्रिया हटाया गया”
सीनियर मैनेजर मैगी प्रसाद ने दावा किया कि लगभग 35 शिक्षकों और कर्मचारियों को उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना सेवा से हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी 20 से 30 वर्षों से संस्था में सेवाएं दे रहे थे, लेकिन उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर तक नहीं दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिन कर्मचारियों ने पीएफ जमा करने, वेतन भुगतान और सेवा अधिकारों को लेकर सवाल उठाए, उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई।
मैगी प्रसाद ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करना बेहद जरूरी है।
चुनाव प्रक्रिया और समिति की वैधता पर विवाद
पूर्व प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों ने समिति गठन और चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रशासकीय अवधि समाप्त होने के बाद जिस तरह चुनाव कराए गए, उस पर कई पक्षों ने आपत्ति दर्ज कराई है।
उन्होंने कहा कि मामला हाईकोर्ट और रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं विभाग में विचाराधीन है, इसलिए किसी भी पक्ष द्वारा स्वयं को पूरी तरह वैध घोषित करना उचित नहीं है।
विरोधी पक्ष का आरोप है कि धारा 27 के तहत वैधानिक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी किए बिना प्रशासनिक फैसले लिए जा रहे हैं।
बैंक खाते और वित्तीय लेनदेन पर सवाल
विवाद अब स्कूल के बैंक खातों और वित्तीय मामलों तक पहुंच गया है। संदीप लाल ने कहा कि खातों को लेकर स्पष्ट स्थिति नहीं होने से शिक्षकों के वेतन, पीएफ जमा और अन्य प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने स्कूल के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और खातों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की ताकि करोड़ों रुपये के लेनदेन की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
दूसरी ओर वर्तमान प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष Atul Arthur ने पूर्व प्रबंधन पर लगभग 30 से 35 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वित्तीय रिकॉर्ड की जांच होने पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आएंगे।



पूर्व प्राचार्य पर दस्तावेज ले जाने का आरोप
वर्तमान प्रबंधन ने पूर्व प्राचार्य Sophia J. Harrison पर स्कूल के महत्वपूर्ण दस्तावेज, कैशबुक, लेजर, बिल-वाउचर और प्रशासनिक रिकॉर्ड अपने साथ ले जाने का आरोप लगाया है।
हालांकि विरोधी पक्ष का कहना है कि पूरे मामले को एकतरफा तरीके से पेश किया जा रहा है और निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आएगी।
“हाईकोर्ट ने वर्तमान समिति को वैध माना” : अतुल आर्थर
प्रेस वार्ता में अतुल आर्थर ने कहा कि हाईकोर्ट ने वर्तमान समिति को वैध माना है और विरोधी पक्ष को किसी प्रकार की राहत नहीं मिली है।
उन्होंने बताया कि 13 दिसंबर 2025 को दायर अपील का निस्तारण हो चुका है और वर्तमान समिति विधिवत तरीके से कार्य कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग स्कूलों में भ्रम और अस्थिरता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
अतुल आर्थर ने यह भी कहा कि स्कूल का संचालन नियमित रूप से जारी रहेगा और विद्यार्थियों के भविष्य पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ने दिया जाएगा।
अभिभावकों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अभिभावकों और विद्यार्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वर्तमान प्रबंधन ने अभिभावकों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है, वहीं विरोधी पक्ष ने पूरे मामले में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
पूरा मामला अब मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, कलेक्टर, शिक्षा विभाग और रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं विभाग तक पहुंच चुका है। विभिन्न पक्षों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित न हो और विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों तथा कर्मचारियों के हित सुरक्षित रह सकें।

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