आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का पहला साल पूरास्थिरता, नरमी और सुधारों की नई राह



भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में संजय मल्होत्रा ने 10 दिसंबर को अपना पहला वर्ष पूरा कर लिया। अपनी पहले की भूमिकाओं में दिखाई देने वाला उनका व्यावहारिक और बारीकी से काम करने का अंदाज अब केंद्रीय बैंक में भी साफ नजर आ रहा है। बैठकें हों या नीतिगत फैसले, मल्होत्रा अपनी सूक्ष्म तैयारी और निर्णायक रुख के लिए पहचाने जा रहे हैं।

रीपो दर में 125 आधार अंकों की कटौती, आक्रामक नरमी का दौर
फरवरी से दिसंबर के बीच आरबीआई ने रीपो दर में कुल 125 आधार अंकों की कटौती की, जो 2019 के बाद सबसे तेज नरमी मानी जा रही है। जून की समीक्षा में आधा फीसदी कटौती ने उद्योग जगत को चौंकाया। जून में सीआरआर को 4 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत किया गया और नीति रुख को समायोजित करने वाले से बदलकर तटस्थ किया गया।

अक्टूबर की नीति: 21 बड़े विनियमन हटे, बैंकिंग क्षेत्र को राहत
अक्टूबर की नीति में 21 विनियमों को हटाते हुए आरबीआई ने ईसीबी नियमों में संशोधन का प्रस्ताव रखा, नियमों को सहज बनाया और बैंकों को एमएंडए फंडिंग की अनुमति दी। शेयरों, आरईआईटी, इनविट और सूचीबद्ध ऋण प्रतिभूतियों के एवज में ऋण सीमा बढ़ाई गई। बड़ी कंपनियों को बैंकिंग प्रणाली में कर्ज सीमा की नई व्यवस्था भी प्रभावी हुई।

साथ ही, अपेक्षित ऋण हानि ढांचे के कार्यान्वयन के लिए अप्रैल 2027 से मार्च 2031 तक का समय देकर बैंकों को बड़ा राहतकाल दिया गया।

महंगाई नियंत्रण सफल, अब विकास पर फोकस
पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास के कार्यकाल में महंगाई नियंत्रण के बाद अब मल्होत्रा नरम मौद्रिक कदमों के जरिए विकास को मजबूत करने के अवसर का उपयोग कर रहे हैं। वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता मजबूत होने से वे व्यापक उदारीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

नियामकीय समीक्षा में सबसे बड़ा सुधार पैकेज
अक्टूबर 2025 में आरबीआई ने छह विशेषज्ञों वाली एक नियामक समीक्षा प्रकोष्ठ का गठन किया। करीब 9,000 पुराने परिपत्र निरस्त किए जा रहे हैं और 11 श्रेणियों में 238 मास्टर निर्देशों के रूप में नियमों को सरल किया जा रहा है। यह हाल के दशकों में शासन और अनुपालन सुगमता का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है।

सरकार द्वारा भी 2025-26 के बजट में गैर-वित्तीय क्षेत्रों के लिए उच्च स्तरीय नियामकीय सुधार समिति की घोषणा की गई है। आर्थिक सर्वेक्षण ने भी विनियम आसान बनाने और रोजगार-सृजन को बढ़ावा देने पर जोर दिया था।

एआई उपयोग के लिए नैतिक ढांचा
मल्होत्रा के नेतृत्व में आरबीआई ने ‘फ्री-एआई’ यानी फ्रेमवर्क फॉर रिस्पॉन्सिबल एंड एथिकल एनेबलमेंट ऑफ एआई’ पेश किया, जो वैश्विक केंद्रीय बैंकों में पहली पहल मानी जा रही है।

“सबसे बड़ा लक्ष्य वित्तीय स्थिरता”
हाल ही में एसबीआई के बैंकिंग एंड इकनॉमिक कॉन्क्लेव में मल्होत्रा ने कहा कि वित्तीय स्थिरता आरबीआई का सर्वोच्च लक्ष्य है। आज भारतीय बैंक मजबूत पूंजी, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और स्थिर लाभप्रदता के साथ पहले से ज्यादा परिपक्व हैं। इसलिए उन्हें अधिक स्वतंत्रता दी जा रही है। अब जिम्मेदारी बैंकिंग उद्योग पर है कि वह इस भरोसे को सही साबित करे।


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