बिलासपुर / रायपुर । High Court of Chhattisgarh ने कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह अनिल टुटेजा को नियमित जमानत दे दी है। यह मामला आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (EOW/ACB) द्वारा दर्ज किया गया है।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश टुटेजा की दूसरी जमानत याचिका पर पारित किया। इससे पहले उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी, लेकिन Supreme Court of India ने उन्हें निर्धारित अवधि के बाद, यदि जांच या ट्रायल में पर्याप्त प्रगति न हो, तो दोबारा जमानत आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी थी।
23 महीने के करीब पहुंची कुल हिरासत
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि टुटेजा 21 अगस्त 2024 से वर्तमान मामले में 18 माह से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं। इसके अलावा, इसी प्रकरण से जुड़े लेन-देन के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई में भी वे पूर्व में हिरासत में रह चुके हैं। इस प्रकार उनकी कुल हिरासत अवधि लगभग 23 माह के करीब पहुंच गई है।
ट्रायल शुरू नहीं, 1,111 गवाह सूचीबद्ध
मामले में अब तक सात चालान (चार्जशीट) पेश किए जा चुके हैं, जिनमें 51 आरोपियों के नाम हैं और 1,111 गवाह सूचीबद्ध किए गए हैं। हालांकि, याचिकाकर्ता के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति (सैंक्शन) अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। इसी कारण विशेष न्यायालय ने संज्ञान नहीं लिया है और आरोप तय नहीं हुए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में गवाहों और हजारों पन्नों के दस्तावेजी साक्ष्य को देखते हुए ट्रायल निकट भविष्य में पूरा होना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में निरंतर कारावास संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन होगा।
दस्तावेजी साक्ष्य, बरामदगी नहीं
न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध मामला मुख्यतः दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है, जो पहले ही जब्त किए जा चुके हैं। उनके पास से कोई अवैध धनराशि, अवैध शराब, नकली होलोग्राम या अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है। ऐसे में साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका भी कम है।
“जमानत नियम, जेल अपवाद”
पीठ ने दोहराया कि “जमानत नियम है और जेल अपवाद।” केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर अनिश्चितकालीन हिरासत उचित नहीं ठहराई जा सकती, जब ट्रायल के शीघ्र पूर्ण होने की संभावना न हो।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत केवल लंबी हिरासत और ट्रायल में देरी के आधार पर दी जा रही है, न कि मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर।
टुटेजा को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और एक सक्षम जमानतदार प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही पासपोर्ट जमा करने, ट्रायल में सहयोग करने और गवाहों को प्रभावित न करने जैसी शर्तें लगाई गई हैं। शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में अभियोजन को जमानत निरस्त कराने की स्वतंत्रता दी गई है।

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