मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई, जिसे सपनों की नगरी कहा जाता है, आज एक गंभीर सच्चाई का सामना कर रही है। जहां लाखों युवा अपने सपनों को पूरा करने यहां आते हैं, वहीं शहर में नाबालिगों—खासकर लड़कियों—के गायब होने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
मुंबई पुलिस के अनुसार, जून से दिसंबर के पहले सप्ताह तक शहर से 370 से अधिक नाबालिग गायब हुए हैं, जिनमें से 268 लड़कियां हैं। यानी कुल मामलों का लगभग 72 प्रतिशत। औसतन हर महीने 55 से 60 बच्चे लापता हो रहे हैं, जो किशोरियों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
कैसे खोज रही है पुलिस?
मुंबई पुलिस के मिसिंग सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई किशोरियां दोस्त के साथ या प्रेम संबंधों के चलते घर छोड़ देती हैं। लेकिन कुछ मामलों में मानव तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के संकेत भी मिले हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जाती है।
गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और लोकल इन्फॉर्मेशन का सहारा लेती है। हालांकि, हर महीने बढ़ते नए मामलों के कारण मिसिंग सेल की चुनौतियां भी बढ़ती जा रही हैं।
घर, स्कूल और समाज की जिम्मेदारी
600 से अधिक मिसिंग बच्चों को खोजने का रिकॉर्ड रखने वाले पुलिसकर्मी राजेश पांडे कहते हैं कि माता-पिता, परिवार और स्कूलों को बच्चों के व्यवहार, गतिविधियों और सोशल मीडिया पर नजर रखने की आवश्यकता है।
वे सलाह देते हैं कि बच्चा अचानक गायब होने पर तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करें, देर करने से जांच प्रभावित हो सकती है।
महीना-दर-महीना लापता बच्चों के आंकड़े
महीना कुल लापता लड़कियां जून 70 56 जुलाई 59 37 अगस्त 51 37 सितंबर 51 37 अक्टूबर 57 41 नवंबर 71 52 दिसंबर (6 तक) 11 8
फैक्ट फाइल
- समयावधि: जून से 6 दिसंबर
- कुल लापता: 370+
- लड़कियां: 268+ (72%)
- सबसे अधिक लापता मामले: नवंबर (71)
- औसत मासिक मिसिंग केस: 55–60
मिसिंग बच्चे की शिकायत कहां करें?
- मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम: 100 या 112
- चाइल्डलाइन (माइनर के लिए): 1098
- निकटतम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करें
- ऑनलाइन रिपोर्टिंग: ‘ट्रैक द मिसिंग चाइल्ड’ पोर्टल (trackthemissingchild.gov.in)

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