दंतेवाड़ा। कभी नक्सल हिंसा के लिए कुख्यात रहा छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा जिला अब शांति, विकास और विश्वास की नई कहानी लिख रहा है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने नक्सलियों से हथियार छोड़कर सरेंडर करने और समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की है।
एसपी गौरव राय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास एवं आत्मसमर्पण नीति नक्सलियों को सम्मानजनक, सुरक्षित और स्थायी जीवन जीने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों की सुरक्षा और पुनर्वास की पूरी जिम्मेदारी सरकार और जिला प्रशासन उठाता है।
नक्सल विरोधी अभियान निर्णायक मोड़ पर
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित नक्सल विरोधी अभियान अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। दंतेवाड़ा जिले में विकास, विश्वास और सुरक्षा की त्रिसूत्रीय नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। प्रशासनिक पहुंच बढ़ने और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हालात तेजी से बदल रहे हैं।
जो इलाके कभी सरकारी योजनाओं से वंचित थे, वहां अब सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। इससे ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधरा है और शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।
विकास कार्यों से कमजोर पड़ा नक्सलवाद
दंतेवाड़ा के सुदूर अंचलों में सड़क निर्माण, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, पेयजल व्यवस्था, बैंकिंग सुविधा और उचित मूल्य की दुकानों की स्थापना की गई है। इन विकास कार्यों से न केवल सुविधाएं बढ़ी हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से ग्रामीणों को इलाज के लिए अब लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती, वहीं शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों की उपलब्धता से बच्चों का भविष्य संवर रहा है। बैंकिंग और राशन व्यवस्था से लोग सीधे सरकारी योजनाओं से जुड़ पा रहे हैं।
सरेंडर करने वालों को मिल रहा सम्मानजनक जीवन
एसपी गौरव राय ने बताया कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों को आधार कार्ड, बैंक खाता, आयुष्मान भारत कार्ड, राशन कार्ड समेत सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी दिए जा रहे हैं, ताकि वे आत्मसम्मान के साथ जीवन जी सकें।
एक साल में 272 नक्सलियों का आत्मसमर्पण
दंतेवाड़ा पुलिस के अनुसार, पिछले एक वर्ष में जिले में 272 नक्सलियों ने सरेंडर किया है, जिनमें 100 से अधिक इनामी नक्सली शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली अब सामान्य नागरिक की तरह जीवन जी रहे हैं और सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।
‘लोन वर्राटू अभियान’ से बदली तस्वीर
नक्सलियों के आत्मसमर्पण में ‘लोन वर्राटू अभियान’ (घर वापस आइए) की अहम भूमिका रही है। इस अभियान से प्रभावित होकर कई बड़े नक्सली नेताओं ने भी हथियार डाले हैं। आज वे सुरक्षित जीवन जी रहे हैं, उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ रहे हैं और परिवार को स्थायी आजीविका के साधन उपलब्ध कराए गए हैं।
सरेंडर के बाद जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें आवास, रोजगार और इच्छा अनुसार खेती-बाड़ी के लिए भूमि भी उपलब्ध कराई जा रही है।
नक्सलगढ़ में ऐतिहासिक बदलाव
पुलिस, सीआरपीएफ और सुरक्षा बलों की मजबूत मौजूदगी से दंतेवाड़ा के सुदूर इलाकों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। नए पुलिस कैंपों की स्थापना से न केवल सुरक्षा बढ़ी है, बल्कि बुनियादी सुविधाएं भी गांवों तक पहुंची हैं।
एक समय था जब राष्ट्रीय पर्वों पर नक्सल प्रभावित इलाकों में काले झंडे फहराए जाते थे, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल रही है। इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर अंदरूनी इलाकों में आत्मसमर्पित नक्सली तिरंगा फहराते नजर आएंगे, जो दंतेवाड़ा में आए ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है।

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